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Gk In Hindi:लूडो का पुराना नाम क्या है?

दोस्तों आज हम बात करेंगे भारत के सबसे प्राचीन खेल लूडो के बारे में

लूडो का इतिहास और इसकी प्राचीन जड़ें

लूडो की उत्पत्ति प्राचीन भारत में हुई , जहाँ इसे चौपर या पचीसी के नाम से जाना जाता था । राजा लोग इसके शुरुआती संस्करण खेलते थे और महाभारत में भी इसका उल्लेख मिलता है , जहाँ पांडवों और कौरवों की कहानी में  पासे के खेल की महत्वपूर्ण भूमिका है। मूल बोर्ड कढ़ाई वाले कपड़ों से बने होते थे और पासे बीजों, सीपियों या तराशी हुई हड्डियों से बनाए जाते थे।

पौराणिक कथाओं में, यह खेल भाग्य, रणनीति और जीवन की अनिश्चितता का प्रतीक था – ऐसे सबक जो केवल एक  बोर्ड गेम की तरह दिखने वाले खेल के पीछे छिपे हुए थे ।

पिछले कुछ वर्षों में, लूडो ने ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म पर जबरदस्त लोकप्रियता हासिल की है। खासकर महामारी के बाद से, लोग सामाजिक दूरी बनाए रखते हुए एक-दूसरे से जुड़े रहने के लिए इस खेल की मांग कर रहे हैं। यह एक सरल खेल है जिसे आमतौर पर 2 या 4 लोग खेलते हैं। यह खेल कुछ प्रमुख ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है। इस ब्लॉग पोस्ट में, हम लूडो के बारे में कुछ ऐसे तथ्यों पर चर्चा करेंगे जो शायद आपको पता न हों। आप यहां क्लिक करके खेलना शुरू कर सकते हैं।

भले ही यह एक सरल खेल हो, लेकिन इसके बारे में बहुत कुछ जानना ज़रूरी है। अगर आप इस खेल को खेलकर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर कुछ पैसे जीतना चाहते हैं, तो यह ब्लॉग पोस्ट आपके लिए ही है। यह खेल कोई रॉकेट साइंस नहीं है, इसलिए अगर आप सही रणनीति बनाकर नियमित अभ्यास करें, तो आप ज़रूर जीतेंगे। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर कई कैश प्रतियोगिताएं चलती रहती हैं, और आप अपनी पसंद की प्रतियोगिता चुन सकते हैं। जितना हो सके भाग लें, लेकिन शुरुआत में मुफ़्त गेम खेलना ज़्यादा फ़ायदेमंद रहेगा।

19 वी सदी में मैसूर के राजा कृष्णराज वोडीयार तृतीय की चार पत्नियां थी और 22 से भी ज्यादा दासिया थी और वे अपनी सभी पत्नियों के साथ पच्चीसी का खेल खेलना चाहते थे. इसलिए उन्होंने 6 खिलाडियों वाला पच्चीसी बोर्ड बनाया. और आगे चलकर उन्होंने 8, 12 और 16 खिलाडियों वाले पच्चीसी का निर्माण करवाया ताकि वो अपने सभी दासियों के साथ भी यह खेल खेल सके.

महाराज वोडियार सिर्फ यही नहीं रुके उन्होंने इस खेल कई बदलाव किये. पच्चीसी के बोर्ड पर उन्होंने नैतिकता जोड़कर इस खेल का रूप ही बदल दिया. उसमे अलग-अलग पायदान पर कर्मो के अनुसार मनुष्य के अगले जन्म की कल्पना की गई हैं जैसे यदि आप अच्छे कर्म करते हैं तो आपको अगले जन्म में राजसिंहासन प्राप्त होगा. महाराजा वोडियार ने इस खेल को धर्म और चरित्र से जोड़ दिया.भगवत गीता में लिखा हैं, जिंदगी एक खेल हैं और खेलना हमारा धर्म हैं. प्राचीन भारत में खेल को अधिक महत्व दिया जाता था. भारत ऐसा देश हैं, जहां भगवान स्वयं खेल खेलते थे. जी हाँ, आज आपको एक ऐसे खेल (Board Game) के बारे बताने जा रहे हैं. जो पूरे विश्व में लोकप्रिय हैं. बहुत से पश्चिम देश दावा करते है कि इस खेल का अविष्कार उन्होंने किया हैं परन्तु इस खेल का सम्बन्ध प्राचीन भारत से हैं. आइये जानते हैं बोर्ड (Board Games) पर खेले जाने वाले प्रमुख खेल लूडो के इतिहास से जुड़ी रोचक जानकारियों के बारे में.

(ludo)

इस खेल को तो आप बखूबी जानते हैं. लूडो आज के समय का सबसे प्रसिद्ध खेल हैं. अपने कभी न कभी तो इस खेल को अवश्य ही खेला होगा. यदि हम इस खेल की जड़ो को ढूंढने जाये तो हमारे सामने आती हैं पौराणिक महाकाव्य महाभारत वह घटना जिसमें पांडवों ने द्रोपदी को दांव पर लगा दिया था.

लूडो को उस समय “पच्चीसी” के नाम से जाना जाता था. महाभारत के युद्ध का कारण यह पच्चीसी का ही खेल था. सिर्फ महाभारत में ही नहीं बल्कि हिन्दू पौराणिक कथाओ में भी पच्चीसी का उल्लेख मिलता ही. पच्चीसी से संबंधित लगभग सभी हिन्दू देवी-देवताओ से जुड़ी कहानियां हैं.

इसका इतिहास इतना समृद्ध है कि आप जितना अधिक पढ़ेंगे, उतना ही रोमांचित होते जाएंगे। इसकी वैश्विक लोकप्रियता भी उतनी ही आश्चर्यजनक है। तो ये कुछ तथ्य हैं जो हम इस रोमांचक बोर्ड गेम से संबंधित आपके साथ साझा करना चाहते थे। यदि आप कुछ और जानते हैं, तो हमें टिप्पणी अनुभाग में लिखें।

घर पर रहें, सुरक्षित रहें और लूडो खेलने का आनंद लें। ऑनलाइन गेमिंग उद्योग के भविष्य की अपार संभावनाओं के बारे में जानने के लिए, फोर्ब्स का यह लेख पढ़ें । विशेषज्ञों का कहना है कि ऑनलाइन गेमिंग की मांग बनी रहेगी। सबसे अच्छी बात यह है कि ये आपको घंटों तक व्यस्त रख सकते हैं, बिना बोर या उदास हुए। इसके अलावा, ये उन लोगों के लिए बेहतरीन हैं जिनमें सामाजिक कौशल की कमी है। इसलिए अब घर के अंदर खुद को व्यस्त रखना कहीं अधिक आसान हो गया है।

एक लोकप्रिय ऐप है जो लूडो को आधुनिक युग में ले जा रहा है। यह क्लासिक लूडो को एक रणनीतिक, वास्तविक खिलाड़ी वाले अनुभव में बदल देता है, जिसमें त्वरित गेम और असली नकद जीतने की संभावना होती है। इस गाइड में, हम संक्षेप में जानेंगे कि लूडो का आविष्कार कैसे हुआ, समय के साथ इसमें कैसे बदलाव आया और यह आज के हमारे पसंदीदा खेल में कैसे परिवर्तित हुआ।

लूडो का इतिहास और इसकी प्राचीन जड़ें

लूडो की उत्पत्ति प्राचीन भारत में हुई , जहाँ इसे चौपर या पचीसी के नाम से जाना जाता था । राजा लोग इसके शुरुआती संस्करण खेलते थे और महाभारत में भी इसका उल्लेख मिलता है , जहाँ पांडवों और कौरवों की कहानी में  पासे के खेल की महत्वपूर्ण भूमिका है। मूल बोर्ड कढ़ाई वाले कपड़ों से बने होते थे और पासे बीजों, सीपियों या तराशी हुई हड्डियों से बनाए जाते थे।

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